अपना पर्यावरण और उसका महत्व

आज मेरा विषय है   

"पर्यावरण " 

को लेकर मैं आज इसी विषय पर बात करने जा रहा हूं पर्यावरण हमारा एक आवास है , यह भुमंडल पर पर्यावरण का महत्व सर्वश्रेष्ठ है ,

और हम सभी के लिए पर्यावरण क्या मायने रखता हैं ? यह आप भली-भांति जानते हैं !

 इसलिए मैं आज इस पर्यावरण का अतिदोहन और जो इसकी हानि हो रही है ,  उसी के बारे में बात कर रहा हूं पर्यावरण ने हमें क्या-क्या नहीं दिया है ?

हम जिस आधुनिक गति से आगे बढ़ रहे हैं उतना ही अधिक हम पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं , पर्यावरण को लेकर बहुत सारे एनजीओ ,समाज सेवक संगठन , और भारत सरकार के द्वारा लाए गए विभिन्न प्रकार के अधिनियम इस पर अपना पूरा प्रभाव बनाए हुए हैं !

हम एक सजग नागरिक होने के नाते हमारा भी तो कुछ फर्ज बनता है पर्यावरण को लेकर ,  हम इसे ऐसे खो रहे हैं कि जैसे हमारे लिए कोई महत्व नहीं है ,  इस चीज का आज जिस प्रकार से वैश्विक महामारी का दौर चल रहा है हम सभी को प्राचीन के दिन याद आ गए हैं कैसे प्राचीन काल में ऋषि मुनि , सम्राट  , राजा , नागरिक  अपने पर्यावरण को लेकर कितने सजग थे ! 

 उनके समय काल में शायद ही ऐसी कोई वैश्विक महामारी रही हो आज हम सभी इस का सामना कर रहे हैं तो कहीं ना कहीं सभी के जिम्मेदार हम खुद भी हैं ? हम अपने दिन-ब-दिन इंसानियत खोते जा रहे हैं  , मैं यह किसी को लक्ष्य नहीं करके बता रहा हूं मैं खुद के ऊपर भी बात कर रहा हूं !

 क्या हम अपने कर्तव्य को भलीभांति निभा रहे हैं ? हिंदुस्तान में युवाओं की संख्या सबसे अधिक है फिर भी हमारे यहां पर पर्यावरण को लेकर कितने सारे आंदोलन हुए हैं पर्यावरण बचाओ , नर्मदा बचाओ , चिपको आंदोलन , दक्षिण भारत की बात करें तो वहां पर भी आंदोलन हुए उत्तर भारत में हुए , पश्चिम भारत , पूर्वी भारत में पर्यावरण को लेकर एक अनेक प्रकार के आंदोलन हुए हैं !  वह करने वाले कोई नहीं हमारे पूर्वज थे उन्होंने आंदोलन क्यों किए थे क्योंकि आने वाले पीढ़ी को शुद्ध पर्यावरण आवास मिल सके आने वाले पीढ़ी आराम से रह सके उनको वह सारी सुख सुविधाएं मिले जो पर्यावरण हमें दे रही हैं !

 इसलिए उनका एकिचार था कि पर्यावरण को बचाए रखना , राजस्थान की जोधपुर प्रांत में  अमृता देवी नामक महिला  का नाम पर्यावरण बचाओ मे सबसे लिया जाता हैं उन्होने अपने प्राण गवा दिए थे !

हमें हमारे लिए और हमारे आने वाली पीढ़ी के लिए पर्यावरण को बचाए रखना अति आवश्यक है , मैं यहां किसी के ऊपर कोई दबाव नहीं बना रहा हूं मैं सिर्फ इतना कह रहा हूं यह क्या हम अपनी भूमिका अच्छी तरह से निभा रहे हैं ? क्या हम युवा होने का सही मतलब निभा रहे हैं ? सही मायने में हम क्या कर रहे हैं ?  हमारा देश किस गति की ओर आगे जा रहा है ? आज का जमाने में विकासशील की होड़ से लगी हुई है बहुत सारे देश विकसित हो चुके हैं , इसी विकसित की पंक्ति में हम भी अपना नाम जोड़ना चाह रहे हैं , इसलिए हम अभी प्रगतिशील पर हैं , 

क्या हमारा कोई दायित्व नहीं बनता है कि हम भी इस प्रगतिशील हिंदुस्तान में अपना योगदान दें ? 

इस देश को एक शुद्ध आवास प्रदान करें हमें हमारी जिम्मेदारियों को समझना होगा ताकि हम सही तरह से हमारे पर्यावरण को बचा सके ! 

हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा युवाओं की आबादी है और अगर हम बात करें विद्यार्थी शक्ति युवा शक्ति की हम अगर अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह से समझ गए तो यह देश बहुत तरक्की करेगा वह मुकाम हासिल करेगा जो हमने कभी सोचा भी नहीं था , कुछ करना है तो अपनी आदतों को बदलना है ऐसी आदतें लानी है जो आने वाले पीढ़ी का अपने देश के विकास में भागीदार बना सके !

इसलिए पर्यावरण के संबंधित हमें अत्यधिक भावनाशील होना होगा !

 इस आवाज को बचाना होगा विकास के लिए बहुत सारे पेड़ों को काटना भी पड़ रहा है , बहुत सारे नए प्रोजेक्ट को चालू करना होता है , बहुत सारी सरकार की परियोजनाएं होती है , उन सबका अपना-अपना महत्व अपनी जगह जरूर है !

 हमें भी अपनी जरूरी चीज जो हमारे लिए अत्यावश्यक है वह है पर्यावरण उसको तो हमें खुद को ही बचाना होगा " मैंने एक मिशन तैयार किया है " मेरा यह मानना है कि हर घर में बैठी है बेटी के नाम ही अपना एक पेड़ लगाए जिस घर में जितनी बेटियां हो उतने ही नाम के अपने पेड़ लगाएं जिस प्रकार हम हमारे समाज में परियों की परवरिश कर रहे हैं उसी प्रकार हम उन्हीं के नाम के लगाए हुए पेड़ो की भी प्रवेश करें उन्हें बड़ा करने में सहायता करें !

 मेरा मिशन का नाम यही है " बेटी के नाम पर पेड़ " क्योंकि जिस प्रकार बेटी अपने घर का विकास तो करती है  दूसरे घर का भी विकास करती हैं अपने संतान को सही रहा भी दिखाती है वह एक प्रथम शिक्षक होती हैं ! उसी प्रकार पेड़ भी खुद धूप में जल कर हमेशा छाया प्रदान करते हैं , फल फूल लकड़ी इत्यादि सब हमें उन्हीं से मिलता है तो क्यों ना हम बेटियों के नाम पर पेड़ लगाकर बेटियों का ही नाम  पेड़ के नाम पर करें ताकि हम उस व्यक्ति को हमेशा हमेशा के लिए जिंदा रख सके इसलिए हमें अपनी महत्वाकांक्षाओं को त्याग कर एक समाज हित में अपना योगदान देना होगा !

ताकि हम अपने इस भौगोलिक आवास की रक्षा कर सकें और आने वाले पीढ़ी को एक नई  शुद्ध आवास प्रदान कर सके !

 हमारे सरकारें दिन ब दिन  पर्यावरण को लेकर बहुत सारे काम कर रही हैं , हमें उनका सहयोग करना चाहिए उनका योगदान करना चाहिए , और अपनी खुद की महत्व को समझकर हमें देश हित में भागीदार होना होगा ताकि हम भी कुछ कर सके इस देश के लिए इसलिए मेरा आप सभी से खास अनुरोध है कि हम अपनी जिम्मेदारियों को समझें सबको मान और सम्मान दें ,  देश के  नागरिक होने के नाते अपने कर्तव्य को भलीभांति समझे , और निभाए अपने उपयोग के अनुसार यही हम पर्यावरण का उपयोग करें , अन्यथा व्यर्थ  ना  करे अनुरोध विद्यार्थियों से हैं पेड़ से बनते हैं अपना पेपर जिस पर हम लिखते हैं बहुत सारे कॉपी किताब यह सब पेड़ों से ही बनती है जितना हो सके उतना हम कोई भी ब्लैंक पेपर का यूज सही तरीके से करें बिना मतलब उनका दुरुपयोग ना करें ! जितनी आवश्यकता हो उतना ही ले कहने को तो यह होगा कि इससे  से क्या फर्क पड़ेगा मगर आप खुद करके देखिए ?

 आपको जरूरत होगी एक पेज की और आप तीन पेज खराब करते हैं उसके बजाय उसी पेज पर छोटे-छोटे लिखकर बहुत सारे नोट्स बनाए जा सकते हैं उसी पेज का उपयोग करके आप अपने साथी को दे सकते हैं ,  ताकि वह नई पुस्तकें  से पेड़ों की कटाई बहुत कम होगी पुस्तकसपाई कम होगी !  मैं तो सिर्फ पर्यावरण को लेकर ही बात कर रहा हूं अगर हमने यह किया तो यह बहुत बड़ा काम हो जाएगा ! इसलिए अपनी अपनी जिम्मेदारी खुद समझें सोचे आप कहां जा रहे हैं कहां तक जाना है हम आज पूर्ण रूप से परिपक्व हो चुके हैं ! इसलिए हम अपनी जिम्मेदारियों को समझ कर पर्यावरण को मान सम्मान दें जितने भी  हैं उनका सम्मान करें !

अपने बेटी के नाम का अपने घर में एक पेड़ जरूर लगाएं आप ! ताकि यह आपकी बेटी के प्रति आपका प्रेम सदा के लिए जीवित रहे और आपको उसकी याद हमेशा आती रहे,  बेटी जिस प्रकार अपना नाम रोशन करके मां-बाप  का अपना ससुराल का नाम रोशन करती है उसी प्रकार पेड़ भी आपको छाया देखकर उसी बेटी का फर्ज अदा करेगा इसलिए मेरे इस मिशन में जितना हो सके आप सभी भागीदार बने "जन जन तक यही बात रहे कि हर घर बेटी के नाम हो पेड़ " बस इतना ही कहना चाहूंगा मेरे इस अनुच्छेद में किसी की भावनाओं को ठेस  पहुंची हो अगर किसी को भी बुरा लगा हो तो मैं क्षमा चाहूंगा जय हिंद धन्यवाद साथियों 


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