अंतर्विरोधी विचार एवं व्यवहार

नमस्कार !

मैं आज अपने अन्तर्विरोधी विचारों और व्यवहार के बारे में बात करने जा रहा हूं !अपनी असल जिंदगी में हम बहुत सारे ऐसे फैसला लेना चाहते हैं,जो अपने अनुकूल हो मगर अपने विचार और अपने व्यवहार के बीच में तालमेल ना बैठने के कारण हमारे कुछ फैसले गलत साबित हो जाते हैं ! और हम जिस क्षेत्र में जाना चाहते हैं उसमें जाने में बाधा उत्पन्न हो जाती हैं ! इन सब का एक ही कारण होता है कि हम विचार के बदौलत सब कुछ हासिल करना चाहते हैं मगर विचार और व्यवहार दोनों को अगर साथ मिलाकर चलें तो जीवन के हर मुकाम को हासिल कर लिया जाता हैं !

अपने अंतर विरोधी विचार हमें कुछ करने की प्रेरणा देते हैं , हमें एक सपना दिखाते हैं कि हम इस सपने को हकीकत में बदल कर अपनी जिंदगी में कुछ ऐसा मुकाम हासिल करें जो आने वाले भविष्य को संवार सकें ! मगर विचार और व्यवहार दोनों का अगर तालमेल ना बैठें तो इन दोनों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता हैं ! मसलन बात यह होती हैं कि विचार दिमाग की उपज होती हैं हमारे दिमाग में विचार आते हैं और हम उस पर विमर्श कर उसको हकीकत में बदलने का प्रयत्न करते हैं, मगर व्यवहार इसके विपरीत दिशा में चल रहा होता हैं! हमें फैसला यह करना होता हैं कि हमें विचारों के आधार पर आगे जाना हैं या अपने व्यवहार के आधार पर बहुत बार ऐसा देखा जाता हैं कि व्यवहार और विचार का मिलन ना होने के कारण हमें सफलता नहीं मिल पाती हैं !

 इसका कारण यह होता हैं की विचार कहते हैं कि मुझे जीवन में अच्छा डॉक्टर वकील इंजीनियर कलेक्टर वगैरह बनना हैं , मगर व्यवहार इन के अनुकूल न होने के कारण व्यक्ति चाहते हुए भी अपना सपना पूरा नहीं कर पाता हैं ! कारण ही होता हैं कि विचार ने आपको यह एक आकृति दिखाई हैं कि मुझे इस प्रकार से आईएएस ऑफिसर या फिर इंजीनियर वगैरह बनना हैं , मगर व्यवहार आपकी विपरीत हैं व्यवहार में आपके सामाजिक लोक व्यवहार आ गया हैं, आपके घर का व्यवहार आ गया हैं, आपके खुद के निजी व्यवहार आ गया हैं !

व्यवहार यह कहता हैं कि आपके पास इस काम को करने के पर्याप्त  साधन नहीं होने की वजह से आप इस क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पाते हैं मगर हम उसी को ढाल बनाकर निरंतर आगे बढ़ते रहें तो यह हमारे लिए गलत साबित होता रहता हैं ! क्योंकि हमें पहले से पता हैं कि जिस मुकाम को हासिल करने के लिए बहुत सारी साधनों की आवश्यकता होती हैं, व्यवहार इस हालात में नहीं हैं कि हमें वह सब सुविधाएं मुहैया करा सकें इसलिए अपनी जिद को छोड़कर हमें व्यवहार और विचार के दोनों का भेद समझते हुए फैसला लेकर जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिएं ! क्योंकि विचार हर रोज अपने दिमाग में अलग-अलग प्रकार से आते रहते हैं और व्यवहार हर रोज नहीं होता हैं व्यवहार निरंतर चलने वाला एक समय होता हैं जो आपकी परिस्थितियों के आधार पर बदलता हैं !

 परिस्थितियां आपके अनुकूल हैं तो आप जीवन के हर मुकाम को हासिल कर पाओगे परिस्थितियां आपके प्रतिकूल हैं तो आप उसमें सह भागीदार नहीं बन पाओगे ! कारण यह होगा कि आपके पास पर्याप्त साधन ना होने की वजह से आप अपने क्षेत्र से दरकिनार भटक रहे हैं , आपके पास विचार हैं मगर व्यवहार नहीं हैं , व्यवहार उस आधार पर होना चाहिए जो विचार के आधार पर चले और आप को साथ में लेकर चले और उसी क्षेत्र में आप को सफल बनाएं ! 

जीवन में बहुत सारे ऐसे फैसले होते हैं जो हम नहीं ले पाते हैं और इन्हीं फैसलों के आधार पर अपना जीवन टिका होता हैं हम अपने विचारों के उपज रखते हैं मगर हालात ऐसे होने के वजह से विचारों में लिया गया फैसला हमेशा गलत साबित हो सकता हैं ! हालातों के आधार पर हमें अपने फैसले बदलने पड़ते हैं अपने विचारों को बदलना पड़ता हैं मगर हम अपने हालातों को नहीं बदल पाते हैं , कारण यह होता हैं कि हमें जिस क्षेत्र में जाना हैं उस क्षेत्र की जानकारी अपने पास होनी चाहिए क्षेत्र के प्रति हमने जो विचार रखा हैं विचार मंथन किया हैं उसी के आधार पर अपने व्यवहार को  बदलने की कोशिश करनी चाहिएं !

 उसके बाद हमें उसी क्षेत्र में निरंतर प्रयत्न करते रहना चाहिएं! तब जाकर हमारे विचार और व्यवहार दोनों का एक साथ संगम होगा और जिस समय हमारा व्यवहार और विचार दोनों का संगम हो गया उसी दिन अपनी सफलता निश्चित रूप अपने हाथ में होगी। विचार ही होता हैं कि मेरे पास बहुत सारे साधन हैं, मैं पुरानी गाड़ी बेचकर नई गाड़ी खरीद लूं या मैं किसी और की गाड़ी देखकर जलन महसूस करूं या फिर किसकी खुशियां देखकर मैं खुद को नाखुश हूं या फिर उनकी अमीरी देखकर खुद को को सता रहा हूं  कि मेरे पास क्यों नहीं हैं ! 

यह सारे विचार होते हैं , व्यवहार यह कहता हैं कि इन सब को हासिल भी किया जा सकता हैं! मगर विचारों को पक्का कर और व्यवहार में तब्दील कर तब जाकर सफलता निश्चित रूप से सफल होगी ! मगर व्यक्ति सिर्फ विचार के आधार पर अपने पंख फैला कर आसमान की सैर पर निकल पड़ता हैं और वह सफल नहीं होने पर अपने आप को दोषी का भागीदार मानता हैं ! मगर व्यवहार और विचार का तालमेल बिठाकर आप जो भी काम करोगे यकीन मानिए आपकी सफलता आपके कदमों में ही होगी ! क्योंकि बिना विचार और बिना व्यवहार आज तक किसी ने कोई हासिल नहीं किया हैं !

 अगर कुछ करना ही हैं तो अपने विचारों को व्यवहार में बदलो और उस विचारों को हर रोज अपने दिनचर्या में परिवर्तन करो कि मुझे यह-यह काम करना हैं इसको अपना व्यवहार बना लो , व्यवहार ही आपके अवचेतन मन को संदेश देगा कि इस व्यवहार को

हकीकत में बदलने का प्रयास करो और उसी दिन से आपके सारे व्यवहार आपकी आदतन बन जाएंगे ! 

और आपका विचार व्यवहार बन जाएगा सारा खेल व्यवहार के आधार पर हो गया उस दिन उस सफलता को आप हंसते-हंसते गले लगा लोगे, आपको कुछ करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी आपने जो सोचा हैं वही तब्दील हो जाएगा हकीकत में !

इसलिए अपने विचारों में व्यवहार को ढूंढो और व्यवहार में बदलने की कोशिश करो ! आपके दिमाग में बहुत सारे विचार आए हैं मुझे बहुत सारे पैसे कमाने मुझे बहुत ही अमीर बनना हैं सिर्फ विचार करने से सपने देखने से कुछ नहीं होता हैं उसको व्यवहार ने बदलो हर रोज उसके ऊपर काम करो वह आपकी एक आदत बन जाएगी फिर देखना उस काम को करने में बड़ा मजा आएगा ! और जिस दिन आपका विचार व्यवहार में हो गया परिवर्तन तब देखना आपके लिए कोई नई चीज नहीं रहेगी कि मैं हासिल ना कर पाऊं !

 सारे जहां में जो भी हैं ,आपने वह चाहा तो आपको जरूर मिलेगा  बस फर्क इतना ही होता हैं कि समझना और समझाना होता हैं अपने दिमाग को ! समझाना कि विचार को व्यवहार में बदल और व्यवहार को बोलना कि विचार के आधार पर दोनों मिलकर एक ही पथ पर चल पड़ेंगे,उसी दिन आपकी कामयाबी आपके पास जरूर होगी जरूर होगी ! 


अगर मेरे इस अनुच्छेद से आप सभी को कोई आघात पहुंचा हों तो क्षमा करें !


 लेखक श्रवण कुमार सुथार

 जय हिंद 

जय मां भारती

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