अकेलापन कैसे दुर करें
नमस्कार
आज का मेरा लेख है " अकेलेपन " पर
हम सभी के जीवन में कभी न कभी अकेलापन जरूर आया हैं ! अकेलेपन ने हमें बहुत कुछ सिखाया हैं, जैसे अपनों का साथ , अपने सपनों का साथ,अपनी किस्मत का साथ, अपने दोस्तों का साथ, अपने घर वालों का साथ, इन सब ने कहीं ना कहीं अपनी भूमिका जरूर निभाई हैं !
हमारी यह व्यस्त जीवनशैली ने हमें अवश्य अकेलापन जरूर दिया हैं हर इंसान के जीवन में यह क्षण अवश्य आता हैं !
अकेलेपन की कमी हमें सबसे अधिकतर रात में खटकती हैं क्योंकि इस समय हम अपने सारे काम से एकदम मुक्त होकर गहरे विचारों में डूबे हुए होते हैं ! डूबे हुए विचारों में हमें पता चलता हैं कि हम क्या-क्या खो रहे हैं ! कुछ पाने के लिए किस हद तक जा रहे हैं ! हम कहीं ना कहीं जीवन में अपने दोस्तों से, अपने करीबियों से बिछड़ते जा रहे हैं ! हमारी बचपन की दोस्ती धीरे-धीरे कहीं ना कहीं खत्म होती नजर आ रही हैं और यह आने की वजह हैं हमारी जिम्मेदारियां इंसान अब जिम्मेदारियों के दबाव में इतना दब गया हैं ! कि उसे खाना, पीना ,अपनों से बात करने का समय तक नहीं मिल पाता हैं ! क्या जिम्मेदारियां इतनी विकराल हो गई हैं ? हमारी कि हम अपने ही बचपन के दोस्तों को भूल गए हैं अपनों के बीच बैठ कर दो पल बात तक नहीं कर पाते हैं माना कि हम बहुत व्यस्त हैं मगर अपनों से ज्यादा तो व्यस्त रहना ही नहीं चाहिए मगर यह भी हमारी एक मजबूरी ही हैं इन सब के शिकार हम खुद हैं !
विद्यार्थियों की अगर बात करूं या फिर जो भी कामकाज करने वाले व्यक्ति की हर प्रकार से व्यक्ति जीवन में इस बोझ में जरूर दबे हुए हैं !उनके मन में कहीं न कहीं अकेलापन जरूर रहता हैं! कुछ ऐसी यादें होती, कुछ ऐसी बातें होती हैं, जो हम चाहते हुए भी किसी को बता ही नहीं सकते हैं ! खुद ही खुद अंदर ही अंदर घुट घुट कर उन परेशानियों का सामना कर रहे हैैं !
ऐसा कोई व्यक्ति नहीं होगा जिसने कभी रात को आंसू ना बाय हो चाहे वह सफल व्यक्ति हो,असफल व्यक्ति हो,किसी भी प्रकार के व्यक्ति के जीवन में यह पल जरूर आता हैं हर व्यक्ति कहीं न कहीं खुद को अकेला महसूस जरूर करता हैं आखिर इसकी वजह क्या होती हैं ?
मुझे ऐसा लगता हैं कि प्रकृति ने यह जो रात बनाई हैं यह सही मायने में इसी अकेलेपन में खुद को खोजने के लिए सबसे कारगर मार्ग हैं ! क्योंकि दिन में कोई भी व्यक्ति अपनी परेशानियों को लेकर कभी रोक नहीं पाता हैं और रात में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं हैं जिसने जीवन में कभी अपनी आंखों से आंसू ना निकालें हो,आए हुए यह आंसू के पीछे बहुत ही गहरा राज होता हैं, दर्द छुपा हुआ होता हैं !व्यक्ति के जीवन में जिम्मेदारियों के इस बोझ से दबे हुए अपनी जिम्मेदारियों को निभाते निभाते वह खुद को भी भूल जाता हैं ! इस भूल को जब वह याद करता हैं रात के समय तो उसकी आंखों में आंसू जरूर आते हैं सबसे ज्यादा युवा पीढ़ी इसी अकेलेपन के शिकार हैं आज क्योंकि आज के जीवन में हर कोई कामयाब होना चाहता हैं एक होड़ से लगी हुई हैं कि जल्दी से जल्दी हम सफल बने और अपने जिम्मेदारियों को समझें, क्या यह उचित है?
आजकल व्यक्ति के ऊपर इतने ज्यादा दबाव बनाया जा रहा हैं स्कूल की पढ़ाई खत्म हुई,कॉलेज की पढ़ाई खत्म हुई,अब बिजनेस करो ,या फिर कोई अच्छी सी नौकरी की तैयारी में लग जाओ और जल्दी से जल्दी इस सफर को खत्म करके अपने जीवन में एक सही पद पर पहुंच जाना हैं यही मंशा होती हैं हम सबकी, क्या यह पूर्ण रूप से सही हैं ??
क्या जीवन हमें यह सब करने के लिए ही मिला हैं,माना कि हम जीवन में बहुत कुछ करना चाहते हैं अगर उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो आज की जीवित अवधि 60 से 70 साल मान के चले इन वर्षों में हम आधा समय तो सोने में ही गुजार देते हैं आधे समय में हम इतनी भागदौड़ करते हैं कि अपने जीवन में सफल भी होना हैं,अपने जीवन में जिम्मेदारियों को भी निभाना हैं, सामाजिक जिम्मेदारियां निभानी हैं, घर की जिम्मेदारी निभानी हैं, इंसान हमेशा दबा हुआ रहता हैं !
हमारे जीवन में ऐसे बहुत सारे मोड़ आए हैं ऐसे बहुत सारे पल आए हैं जिन्हें हम कभी भुला नहीं सकते हैं उन्हीं को याद कर हम रात को अवश्य अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हैं और शायद इसी की वजह से आंखों में आंसू आ जाते हैं !
फिर हम हताश,और निराश,होकर बैठ जाते हैं क्या यह जीवन का समाधान है ? बिल्कुल नहीं हो सकता हैं क्योंकि अगर जीवन मिला हैं तो हमें भागदौड़ करनी पड़ेगी और यह तो हमारी दैनिक दिनचर्या हैं ! उसे तो हमें हर हाल में पूरा करना ही होगा और यह सब करने के लिए हमें अकेलापन तो जरूर लगेगा हम कई बार अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं होते हैं कई बार हमारा मनमुटाव हो जाता हैं ! हम जो भी बिजनेस करते हैं उसमें भी हमें सफलता नहीं मिलती हैं या तो बहुत निराशा हाथ लगती हैं !
मगर इन के बावजूद भी हमारे जीवन में खुशहाली लानी हैं इन सब का सामना करते हुए अपने परिवार को समय देते रहे और अपने व्यवसाय में हर रोज नया करने की कोशिश करें अवश्य आप कामयाब होंगे जरुर सफलता हाथ लगेगी !
धन्यवाद
जय हिंद
लेखक श्रवण कुमार सुथार
Bht acha likha h....akelepan ko smjh kr agr isse ladne ka hosla rkha jaye to hm sb zrur isse nikl skte h
ReplyDeleteBahut achcha likha h
ReplyDeletevery well written brother
ReplyDeleteAmazing keep it up
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