दुनिया का सबसे बड़ा दहेज
दुनिया का सबसे बड़ा दहेज
- हमारी भारतीय संस्कृति में पहले के जमाने में दहेज का महत्व हुआ करता था ! दहेज के बिना कोई भी व्यक्ति किसी भी लड़की के साथ शादी नहीं करता था,दहेज को सबसे ऊपर रखा जाता था और उसी की बदौलत शादी की जाती थी जिस गरीब परिवार में दहेज देने की क्षमता ना होने की वजह से उन्हें आए दिन बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था ! यह रूढ़िवादी परंपरा अत्यंत भयंकर हो चुकी थी, इसके चलते लाखों महिलाओं ने अपने जीवन के साथ समझौता किया हैं ! उन्होंने अपनी जिंदगी का परित्याग कर कर दूसरों की खुशी के हित में अपनी जिंदगी को हंसते-हंसते समर्पित कर दिया, धन्य हैं वह भारतीय नारी जिसने अपने माता-पिता के लिए अपनी जिंदगी की कुर्बानी यूं ही दे दी शिक्षा के अभाव में आए दिन इन महिलाओं को अत्यंत कठिन समय से गुजरना पड़ता था !
- क्योंकि शिक्षा के अभाव में अपनी मानसिक विचारधारा को बदलने के लिए कोई साधन नहीं था ! जिसके चलते इन महिलाओं के प्रति क्रूरता का व्यवहार किया जाता था हर प्रकार से घर में एक नौकर की तरह रखा जाता था मानो यह शादी नहीं हुई है कोई अपनी खरीदी गई संपत्ति के हिसाब से उनके ऊपर अपने अधिकारों को चला रहे थे ! जो सरासर गलत था मानवता के नाम पर यह अत्यंत बुरा प्रभाव था जिस मात देवी की हम पूजा करते हैं हमारी संस्कृति में इतनी महानता बताई गई हैं फिर भी हम इस गंदी हरकत से कभी ऊपर नहीं उठते हैं आज के आधुनिकता में यही हाल हैं अभी भी चल रहा हैं ! भले ही दहेज प्रथा खत्म हो गई हो, भले ही सती प्रथा खत्म हुई हो, मगर कहीं ना कहीं यह बीज आज भी हमारी संस्कृति में पनप रहे हैं इन बीजों को सींचने वाले हैं कौन ? इतने शिक्षा का महत्व होने के बाद भी आज भी हमारी भारतीय नारी इन सारी समस्याओं से गुजर रही हैं उनके लिए तो सारा दिन आप अपना काम करो अपने खेतों में काम करो पूरा दिन इसी काम में लगे रहते हैं फिर भी उनका कोई मान और सम्मान नहीं होता हैं ! उन्हें आहे दिन भिन्न भिन्न प्रकार के तानों से अपनी सुबह की शुरुआत करनी पड़ती हैं हम यह भूल क्यों जाते हैं हम जिसे लेकर आए हैं अपने घर में वह कोई आपकी संपत्ति नहीं हैं उनका भी अपना जीवन हैंं , उनके भी अपने जीवन के सिद्धांत हैं, उनको भी जीने की इच्छा हैं, उन्हें भी आगे बढ़ने का पूरा हक हैं, मगर पुरुष प्रधान समाज आज भी इन बातों पर कभी गौर नहीं करती हैं !
हमेशा इनका शोषण करने में विश्वास रखते हैं ! हम आज भले ही शिक्षित हो रहे हैं भारत में शिक्षित व्यक्ति की संख्या हर रोज बढ़ती जा रही है भारत शिक्षा के क्षेत्र में जितने भी तरक्की कर ले मगर जब तक ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की तरक्की नहीं होगी देश का विकास थोड़ा असंभव लगता हैं ! आज की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में किसी से कम नहीं हैं आज की महिलाओं को अवसर की जरूरत है अगर उन्हें अवसर प्रदान किया जाए निसंदेह में अपने देश का नाम अपने राज्य का नाम और अपने घर का नाम जरूर रोशन करने में अपना शत प्रतिशत योगदान देंगी ! मगर जहां तक शिक्षा का अभाव रहेगा वहां पर रूढ़िवादी परंपराओं के बीज ही पनपते रहेंगे हमारे समाज को सबसे ज्यादा जरूरत हैं तो वह हैं शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति शिक्षा के क्षेत्र में तरक्की सही रूप हैं ! और सही दिशा की शिक्षा की अत्यंत आवश्यकता हैं, यह ही एक साधन हैं जो हमें अखंडता में एकता के सूत्र में रखने का काम करता हैं !
हमें अपने क्षेत्र में जीवन का कोई भी मिले, समाज सेवा में अपना योगदान देना उन्नति में अपना योगदान अवश्य दें , भारत सरकार के द्वारा जारी की गई पहल," पढ़ेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया " इस मुहिम को हमें अपने छोटे से छोटे ग्रामीण क्षेत्रों में सुव्यवस्थित ढंग से स्थापित करना हैं आगे बढ़ाने में अपना योगदान देना हैं ग्रामीण क्षेत्र के मुकाबले शहरी क्षेत्र अधिक सक्षम हैंं यहां की बालिकाएं, महिलाएं, आए दिन अपनी तरक्की में योगदान दे रही हैं ! यहां एक शिक्षित समाज का निर्माण हो चुका हैं अधिकारों के प्रति जागरूकता हैं सब जानते हैं ! मगर आज भी हिंदुस्तान के रूढ़ीवादिता के परंपरा के बीज इतने गिरे हुए हैं उनकी जड़ें इतनी गहराई में समा गई हैं उन्हें निकालना भी मुश्किल लग रहा हैं इसके लिए प्रयास कर रहे हैं हमें और ज्यादा प्रयास करने की आवश्यकता हैं ! ताकि हम इस सत्र में और ज्यादा उन्नति कर सकें अपना खुद का विकास कर सके महिलाओं में दहेज की प्रथा खत्म हो चुके हो मगर आज भी कहीं न कहीं यह जरूर चल रही हैं एक बात पर विचार कीजिए कभी अपने मन में विचारों के बवंडर में खो जाइए विचार यह कीजिए कि आप जिससे शादी करने जा रहे हैं, जो माता पिता अपनी बेटी आपको दे रहे हैं आपने उनको ऐसा क्या दिया हैं जो उल्टा और आपको उपहार दिया जाए एक बाप अपने प्राणों से प्यारी बेटी को आप के प्रति समर्पित करता हैं, एक बहन अपनी हर समय उसके साथ देने वाली बहन को आप के प्रति समर्पित करती हैं, एक मां दुनिया में सब कुछ अपना बांट सकती हैं मगर कभी संतान का बंटवारा नहीं चाहती हैं वह भी अपनी बेटी की विदाई हस्ती हस्ती कर देती हैं, एक भाई हर समय हर क्षण सुरक्षा रक्षा कवच बन के रहने वाले अपनी बहन को भीगी आंखों से आपके प्रति समर्पित कर देता हैं, इससे बड़ा दहेज और क्या हो सकता हैं ! दहेज शब्द अपने आप में एक गलत परिभाषा अभिव्यक्त कर रहा हैं !
कितना खुश किस्मत वाला होता हैं वह जिन्हें अपने जीवन के हमसफर इतने समझदार, काबिल, होनहार, मिल जाते हैं ! फिर भी अपने शिक्षा का घमंड उनके ऊपर आहे दिन थोपते रहते हैं पढ़े लिखे अनपढ़ लोग समाज में इनकी भी संख्या भी बढ़ने लगी आखिर क्या साबित करना चाहते हैं आप सक्षम हैं हमें कोई एतराज नहीं है, आप अच्छा कमाते हैं हमें कोई मतलब नहीं हैं, जीवन के क्षेत्र में आप उन्नति कर रहे हैं हम आपके साथ खड़े हैं, मगर कभी उनके जीवन का समझौता, उनके जीवन का फैसला, खुद मत करना सबको अपने अपने अधिकार हैं, सबको अपने अपने फैसले करने की पूर्ण रूप से स्वतंत्रता हैं, तो उनके समक्ष हमें अपना सहयोग देना चाहिए ना कि उनका मनोबल गिर जाएं कोई आगे बढ़ रहा हैं तो उसके प्रति अपने समर्पण का भाग दिखाइए ! कोई कुछ समाज में नया करें तो उसकी एकता में अपना योगदान दीजिए अपने आप को एक महान कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति बनाने की मेहनत कीजिए । अपना योगदान देकर समाज के रूढ़िवादी परंपराओं के प्रति अपना एक नजरिया विकसित कीजिए ताकि समाज की हर प्रकार से उन्नत हो सके ! और आप ही से विनती के भागीदार बनें, जात पात का भेदभाव मिटाकर अमीर गरीब का भेदभाव भूलकर एकजुट होकर नए भारत के निर्माण में अपना योगदान जरूर दीजिए ! जातिवादी परंपरा हैं, यह कोई दूसरी परंपरा नहीं हैं यह सिर्फ अपने मानसिक रूप से विकसित की गई परंपराएं हैं !
अपने समाज के प्रति कर्तव्य निष्ठा के प्रति समर्पित कीजिए अपनी विचारधारा को बदलकर समाज के लिए भी अपने कुछ क्षण अवश्य निकालें ! ताकि समाज का बदलाव ही आपके असली मायने में बदलाव होगा, निवेदन आपसे यही करता हूं जातिवादी का झंडा फहराने वाले जरूर मिलेंगे हमें, उसे कोई एतराज नहीं हैं मगर जब तक आपने ऊपर कोई बात हैं तो इस बात को यहीं दबा दीजिए क्योंकि आप एक आधुनिक भारत में निवास कर रहे हैं और अपने विचारों को थोड़ा ऊंचा रखकर मानवता का धर्म अवश्य निभाए यही सबके लिए हितकारी रहेगा ! सबका साथ सबका विकास इसी में निहित हैं अनुरोध यह करता हूं के जातिवाद के प्रति अपने रूढ़ीवादी परंपराओं के हिसाब से मानसिकता बनाई गई हैं, उसका परित्याग कीजिए और नई मानसिकता के साथ अपने जीवन का शुभारंभ कीजिए !
मेरे इस लेख से अगर किसी की भावना को ठेस पहुंची हैं तो मैं माफी चाहता हूं ! मेरा किसी से कोई मतलब नहीं था यह सिर्फ मेरे अपने निजी विचार हैं और यह मेरी सोच और मेरी समझ और मेरा अनुभव हैं, बाकी किसी के प्रति मेरा कोई भेदभाव का मकसद नहीं था ! धन्यवाद जय हिंद
लेखक श्रवण कुमार सुथार
वाह क्या हकीकत बयां किया है बहुत बढ़िया
ReplyDeleteThank you
DeleteGood
ReplyDeleteThank you
DeleteBht shi bol rhe hain...samaj k prati hm apne kartavya bhul jate h
ReplyDeleteThank you
Deleteबहुत खुब
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