खुशियों के आधार पर ही नए जीवन का निर्माण होता हैं !

 खुशियों के आधार पर ही नए जीवन का निर्माण होता हैं !

खुशी एक ऐसी चीज है जिससे ज्यादातर लोग हर दिन संघर्ष करते हैं और कभी-कभी यह उनसे छीन भी लेती है।  वे अक्सर सोचते हैं कि अगर उनकी स्थिति अलग है तो वे खुश हैं। आपने भी कभी सोचा होगा कि आप की स्थिति कुछ और होती और आज आप एक कहीं नई जगह होते यह मन के भाव अपने जेहन में आते रहते हैं यह एक प्रक्रिया है इसी प्रक्रिया के चलते अपने विचारों का जन्म होता है इस जन्म धीरे-धीरे बड़े होते जाते हैं और अपनी कल्पनाओं का आकार ले लेते हैं जिसे हम विशाल कहते हैं या कल्पना कहते हैं !

हम अपने जीवन में नियमित रूप से बोलने वाले शब्दों में ज्यादा विश्वास करते हैं हम इस धारणा के आधार पर यह कहते हैं कि "अगर "मेरे पास जियो होता, तो मैं वैसा होता ! "अगर" मैं इस यात्रा में होता तो, ऐसे होता ! "अगर "मैं इस नौकरी में होता तो मैं वैसा काम करता !

        अक्सर हम इसे 'अगर' कहते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर समझे तो एक महिला के रूप में मैं चाहती हूं कि मेरे पति मुझसे बेहतर हों।  काश मुझे एक बेहतर नौकरी मिल जाती।  मैं चाहता हूं कि बच्चे बड़े होकर घर से बाहर चले जाएं। यह भाविक दिमाग में आने वाली है दैनिक का प्रक्रिया है मनोवैज्ञानिक के अनुसार इंसान अपनी खुशियों के लिए अपने रास्तों को स्वयं ढूंढता हैं और उसके ऊपर अपने आप को पूर्ण रूप से डाल देता हैं

        हम "अगर" के सपने देखने में अपना कीमती समय बर्बाद कर सकते हैं।  बहुत से लोग इस जाल में फंस जाते हैं और बहुत ही दयनीय परिस्थितियों में अपना जीवन व्यतीत करते हैं। ऐसी विक्रांत परिस्थिति में ना फंसे कर अपने मन को एक सही दिशा में एक सही मार्गदर्शन पर लगाना चाहिए जिससे आपके जीवन में कुछ नया परिवर्तन हो आप में नया परिवर्तन लाने के लिए आप नियमित रूप से अपनी एक दैनिक दिनचर्या उस में होने वाले नैतिक कर्तव्य को मिलाते जाइए और उनके ऊपर नियमित रूप से काम कीजिए यह आपके लिए एक सिद्धांत के रूप में साबित होंगे और आपके जीवन को एक नई दिशा प्रदान करेंगे।

   समस्या यह हैं कि वे उनके पास आने का आनंद कैसे लेते हैं।  यह पहचानें योग्य है।  खुशी जब आती हैं तो इतनी छोटी लगती है, जल्दी मिट जाती है। खुशियों के महत्व को पहचान नहीं मिलती हैं जब खुशी आती हैं तब उसका आभास कुछ क्षण भर के लिए होता हैं ! हम खुश होते हुए भी इस खुशी का पूर्ण रूप से सदुपयोग नहीं कर पाते हैं हम जो चीज हमारे पास नहीं हैं ! उसकी कल्पना में फंसे हुए रहते हैं और यह खुशी अपना रास्ता स्वयं अलग ढूंढ लेती हैं ! और आपसे यह हटकर कई और निवास कर जाती हैं ! 

          जीवन के इस आयाम मैं खुशी के क्षण के बजाय दुख के स्वरों को ज्यादा याद किया जाता हैं उनके ऊपर अपना शत-प्रतिशत लगाकर हम प्रतिदिन अपने खुशी का सर्वनाश करते जाते हैं ! और दुखी वाले शब्दों को ज्यादा याद कर कर अपने अवचेतन मन में यह विचार को पक्का कर लेते हैं, कि मेरे जीवन में कुछ भी खुशी के लिए नहीं बचा हैं, या नहीं हैं ! यह दोहरी मानसिकता हमारे जीवन के लिए एक खतरा बन सकती हैं,हमारी तरक्की में बाधा बन सकती हैं, हमारी सफलता में अड़चनें पैदा कर सकती हैं इसलिए अपने मन को एकाग्र शांत कीजिए और अपने मन को एक सही संकेत दीजिए कि आपके जीवन में नियमित रूप से खुशियों का आदान-प्रदान हो रहा हैं आप स्वस्थ एवं खुश मिजाज में हैं ! 


एक कल्पना के लिए खुशी गलत है।  मैं यहां यह कहने के लिए हूं कि खुशी कोई एहसास नहीं है, यह जीवन का एक तरीका है।  यदि आप कुछ बुनियादी सिद्धांतों का पालन करते हैं तो हर दिन समृद्धि आपकी होगी। आपके जीवन में हर प्रकार से खुशियां ही खुशियां ली हो जाएगी अगर नियमित रूप से सकारात्मक ऊर्जा का अपने भीतर संचार होने दिया जाए तो निश्चित रूप से आपका जीवन चमक उठेगा आपके जीवन में एक क्रांति आएगी !

        सबसे पहले, आपको अभी अपने आंतरिक मन की स्थिति में होना चाहिए।  कल चला गया और हमें कल की गारंटी नहीं है, इसलिए आपको अभी उपस्थित होने की आवश्यकता है। वर्तमान की दशा को देखते हुए अभी के लिए अपने सपनों को संजोए और इस प्रकृति के साथ अपने तालमेल को बिठाए रखें यह आपकी सफलता के लिए से भागीदार होंगे !

       दूसरा, आपको अपने विचारों और अपने मन में आने वाले विचारों को नियंत्रित करने की आवश्यकता है।  खुशी को मन की स्थिति कहा जाता हैं और खुशी का रास्ता अपने मन को सही स्थिति में लाना हैं !

        अगर मैं हैदराबाद में रहता हूं और मैं शिमला में रहना चाहता हूं, तो मुझे राज्य बदलना होगा।  मुझे उस स्थिति में बने रहने के लिए कुछ बदलाव करने होंगे।  इस सादृश्य में हम ट्रेन से जाने का फैसला करते हैं या फिर हवाई जहाज का उपयोग कर सकते हैं।  ट्रेन सही दिशा में जाती है और हम अपने गंतव्य तक पहुंच जाते हैं।  हमें यह जानने की जरूरत हैं कि हम किस ट्रेन में हैं या किधर जा रहे हैं।

        आइए जानते हैं इस ट्रेन के बारे में अपने विचार।  यह सही है, अपनी सोच को प्रशिक्षित करें।  यदि आप हैदराबाद में नहीं रहना चाहते हैं, तो आपको सही ट्रेन लेने की जरूरत हैं।  यदि आप अपने मन में विचारों की एक ट्रेन की अनुमति देते हैं, तो आप आगे बढ़ेंगे और वांछित गंतव्य तक कभी नहीं पहुंच पाएंगे। इसी प्रकार अपने मन के विचारों की ट्रेन को जिस वह दौड़ आएंगे वह आपको उसी दिशा में ले जाएगी कहने का साफ-साफ मतलब यह है कि आप अपने मन के विचारों के बदौलत पर ही अपने जीवन का निर्माण स्वयं करते हैं आपके लिए आपके द्वारा रचा हुआ खुद का एक मंजर हैं !

        जीवन इस पड़ाव में मन की स्थिति को मापना सबसे जरूरी होता हैं आपके मन के विचार ही आपके जीवन की रथ के उस घोड़ों के जैसे होते हैं,जो आपको एक सही दिशा देते हैं आपने ऊपर देखा होगा हैदराबाद में ना रहने की बजाय आप शिमला में रहना पसंद करेंगे ! तो गंतव्य स्थित स्थान पर पहुंचने के लिए आपको ट्रेन का सहारा लेना पड़ रहा हैं, राज्य बदलने की आवश्यकता हैं, ठीक उसी प्रकार अगर आपके जीवन में कुछ सकारात्मक विचारों का बीज बोना चाहते हैं और अपनी सफलता को हासिल करना चाहते हैं तो आपके जीवन में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो ऐसे ही विचारों को अपने अंदर उत्पन्न करने होंगे, ऐसे लोगों की संगत में रहने होंगे जो आपके लिए हर प्रकार से आपकी सफलता के दरवाजे खोल दे !


        सही ट्रेन में चढ़ने के लिए टिकट के लिए धन्यवाद दे।  कृतज्ञता एक प्रवृत्ति हैं और जब हम अपनी समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय हमारे पास जो कुछ भी हैं उसके लिए धन्यवाद कहना चाहते हैं, तो हमें यह भी एहसास होता हैं कि हम वहां पहुंच सकते हैं जहां हम होना चाहते हैं।अपने जीवन मैं कृतज्ञता का भाव अवश्य रखें अपने पास जो चीजें हैं उसी में अपनी खुशी मानते हुए भगवान का हर शुक्रिया अदा कीजिए जो जीवन आपके पास हैं ऐसे जीवन के लिए हजारों लाखों लोग तड़प रहे हैं ?आप जिन वस्तुओं को धारण करते हैं आप जिस स्थिति में रहते हैं ऐसी स्थिति की कल्पना करना लोगों के लिए एक सपने भर का काम हैं ! इसलिए अपने मन में कृतज्ञता का भाव अवश्य रखें और प्रभु का धन्यवाद निरंतर रूप से करते रहे यह आपकी सफलता के लिए अति आवश्यक होगा !


धन्यवाद जय हिंद

 लेखक श्रवण कुमार सुथार

Comments

  1. Oh ho kya baat h lekhak mahodaye

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  2. Waah....bht gehrayi se sochte ho...khushi k bare me itni gehrayi se ajtk nhi socha tha

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  3. Kya baat h...bht gehrayi se socha h apne.... khushi or santushti k bare me

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