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योग जीवन की उत्पत्ति हैं, तप की भूमि हैं, संसार का कर्ता हैं, योग सर्वोपरि हैं, योग उन्नती हैं !

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  ​योग का जन्म स्थान सनातन धर्म हिंदू और भारत भूमि रही हैं योग ने हमेशा तरक्की की हैं और आज भी विश्व में अपनी तरक्की का झंडा लहरा रहा हैं ! योग गुरु पतंजलि ! योग हमारी धरोहर हैं, हमारी थाती हैं, योग से ही हमारी संस्कृति हैं, और सभ्यता हैं, योग से अपने जीवन का विकास हैं, योग से अपने जीवन का उत्थान हैं, योग सर्वोपरि हैं  ! ​  योग प्राचीन प्रथाओं का एक समूह हैं जिसे सबसे पहले भारत में विकसित किया गया था।  यह आज भी देश में लोकप्रिय है, और इसे एक आध्यात्मिक व्यायाम माना जाता हैं, कई भारतीय इसे आत्मज्ञान प्राप्त करने के तरीके के रूप में देखते हैं, योग को चार प्राथमिक श्रेणियों में विभाजित किया गया हैं !             तपःस्वाध्यायेश्वरप्रणिधानानि क्रियायोग:॥ (तप, अध्यात्मशास्त्रों के पठन-पाठन और ईश्वर शरणागति – ये तीनों क्रिया योग हैं) १ भक्ति योग, २ ज्ञान योग, ३ कर्म योग और ४ राज योग ! जबकि योग को आमतौर पर पश्चिम में सिर्फ एक व्यायाम के रूप में देखा जाता है,  भारत में योग से हमारी संस्कृति का उत्पन्न हुआ हैं हमारे ऋषि-मुनियों ने योग को अपने...

नियमित दिनचर्या और सकारात्मक ऊर्जा से अपने जीवन में हमेशा क्रांति आती हैं !

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  ​ नमस्कार आज हम बात करेंगे अपने चेतन मन और अवचेतन मन की इनके जरिए हम अपने जीवन में किस प्रकार से क्रांति ला सकते हैं, और इनका उपयोग किस हिसाब से हम कर सकते हैं ! हमारे विचारों का आयाम इस प्रकार से बना हुआ हैं कि हम जो सोचते हैं उसे के अनुरूप हमारे जीवन में वह क्रियाएं होना चालू हो जाती हैं ! जैसी क्रिया होती हैं वैसी हमें तरक्की जीवन में दिखाई देती हैं !  1 . चेतन मन और 2. अवचेतन मन। दोनों के कई और भी स्तर होते हैं। सम्मोहन के दौरान अवचेतन मन को जागृत किया जाता हैं। ऐसी अवस्था में मन की शक्ति को और अधिक तरीके से जाना जा सकता हैं ! मगर इस तकनीक का उपयोग हम किसी जानकार के अनुरूप ही करें तो बेहतर उपयोग रहता हैं क्योंकि उस वक्त वह सम्मोहनकर्ता के निर्देशों का ही पालन कर रहा होता हैं और जो जैसा उनको आदेश दिया जाता हैं उन्हें के अनुरूप अपने मन की गतिविधियां होने लगती हैं ! 1. चेतन मन   चेतन मन हम दैनिक जीवन में जो कार्य करते हैं खुली आंखों से देखे हुए हम जो भी काम करते हैं वह हमारा चेतन मन के उपयोग से होता हैं ! चेतन मन में हमारे दैनिक जीवन की जितनी भी गतिविधियां होती हैं हमा...

प्रगतिशील देश में सबसे बड़ी बाधा हैं, तो वह हैं, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, बेईमानी।

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  आज का विषय हैं प्रगतिशील देश में सबसे बड़ी बाधा हैं, तो वह हैं, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, बेईमानी। आज के दिन में हम ऐसे हिंदुस्तान में निवास करते हैं जहां पर यह कभी सोने की चिड़िया हुआ करता था ! भारत देश विश्व गुरु हुआ करता था ! आज उसी देश नाम भ्रष्टाचार में कहीं देशों से आगे आता हैं ? आज जाने की वैश्विक स्तर पर भारत को भ्रष्टाचार में कितने अंक मिले हैं और यह अंक निर्धारित कौन करता हैं ? भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ कौन-कौन से आज तक संविधान संशोधन किए, या फिर कितने बिल लाए हैं, हम उन पर बात करने जा रहे हैं         International Anti-Corruption Day  अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस हर साल 09 दिसंबर को दुनियाभर में मनाया जाता है. भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 31 अक्टूबर, 2003 को भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन को अपनाया गया था !  अंतरराष्ट्रीय कमेटी ने माना कि भ्रष्टाचार एक जघन्य कृत्य किसी लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा हैं ! संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के द्वारा बनाएगी यह कमेटी भ्रष्टाचार के ऊपर निगरानी ...

सकारात्मक विचारों की शक्ति और जीवन के बदलते आयाम

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    प्रेरणा के लिए आपको कुछ की आवश्यकता हो सकती हैं, यदि आप इस वर्ष पिछले वर्ष की लक्ष्य सूची का उपयोग कर सकते हैं क्योंकि यह उतना ही अच्छा हैं जितना कि नया।  हम सभी प्रेरणादायक सोच से लाभान्वित हो सकते हैं, पिछले वर्ष की सूची के अनुसार इस वर्ष के नए अनुभव को अपनी जिंदगी में लाए और एक परिवर्तित जिंदगी के लिए तैयार करें खुद को ! प्रेरणादायक बातें हमेशा अपने लिए ज्ञान का उजाला होता हैं जो हमेशा सही रहता हैं आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करता हैं ! और अपने लिए आवश्यक होता हैं ऐसे विचारों को अपने जीवन में हमेशा उतारना चाहिए जो हमारे लिए हितकारी हों ! हम कैसे सीमित ज्ञान में पड़े हुए हैं ? बचपन में लेकर आज तक हमने जो भी देखा पड़ा सोचा समझा उसी के आधार पर अपने ज्ञान का विस्तार हुआ हैं और उसी ज्ञान के आधार पर हम सपने देखते हैं अपने विचार को डालते हैं !                      जैसा हमने देखे हैं हमने अनुभव किया है उसी के अनुरूप आज भी हमारा जीवन हैं यह सारा जीवन अपने उस सीमित ज्ञान तक हैं, जो आपने अभी तक एकत्रित करके अपने अवचेतन...

आत्म सुधार से जीवन में कैसे परिवर्तन लाएं,और किस हद तक हम परिवर्तन ला सकते हैं !

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  नमस्कार आज का मुख्य विषय हैं अपने जीवन में आत्म सुधार करके हम कैसे अपने जीवन को और बेहतर बना सकते हैं और इस बेहतर जीवन में हम कैसे बेहतरीन कार्य कर सकते हैं इन सब पर हम आज विचार विमर्श कर रहे हैं ​किसी को कैसे पता चलेगा कि कोई आत्म-सुधार के लिए तैयार है? यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका कोई निश्चित उत्तर नहीं हैं। यह कुछ हद तक व्यक्ति के स्वयं  के ऊपर निर्भर करता हैं कि वह किस प्रकार से अपने आप को इस विषय की प्रक्रिया में डाल देता हैं आत्म सुधार की आत्मा कुंज में कैसे वह अपने आप को निकाल लेता हैं !               अधिकांश लोगों के पास लक्ष्य होते हैं और उन्हीं लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अपने साधन जुटाने लगते हैं, सपने या आकांक्षाएं होती हैं लेकिन यह नहीं पता कि उन्हें कैसे प्राप्त किया जाए। वे आत्म-सुधार और अपने आदर्श जीवन के बारे में सोच रहे होंगे, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि योजना कैसे शुरू करें और उन्हें लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। सुधार की प्रक्रिया में अपनी योजनाओं का अत्यंत महत्व हुआ करता हैं, जिस प्रकार की आपकी योजनाएं होती हैं उसी...

खुशियों के आधार पर ही नए जीवन का निर्माण होता हैं !

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  खुशियों के आधार पर ही नए जीवन का निर्माण होता हैं ! खुशी एक ऐसी चीज है जिससे ज्यादातर लोग हर दिन संघर्ष करते हैं और कभी-कभी यह उनसे छीन भी लेती है।  वे अक्सर सोचते हैं कि अगर उनकी स्थिति अलग है तो वे खुश हैं। आपने भी कभी सोचा होगा कि आप की स्थिति कुछ और होती और आज आप एक कहीं नई जगह होते यह मन के भाव अपने जेहन में आते रहते हैं यह एक प्रक्रिया है इसी प्रक्रिया के चलते अपने विचारों का जन्म होता है इस जन्म धीरे-धीरे बड़े होते जाते हैं और अपनी कल्पनाओं का आकार ले लेते हैं जिसे हम विशाल कहते हैं या कल्पना कहते हैं ! हम अपने जीवन में नियमित रूप से बोलने वाले शब्दों में ज्यादा विश्वास करते हैं हम इस धारणा के आधार पर यह कहते हैं कि "अगर "मेरे पास जियो होता, तो मैं वैसा होता ! "अगर" मैं इस यात्रा में होता तो, ऐसे होता ! "अगर "मैं इस नौकरी में होता तो मैं वैसा काम करता !         अक्सर हम इसे 'अगर' कहते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर समझे तो एक महिला के रूप में मैं चाहती हूं कि मेरे पति मुझसे बेहतर हों।  काश मुझे एक बेहतर नौकरी मिल जाती।  मैं चाहता हूं कि बच्चे ...

व्यवहारिक जीवन में नैतिक मूल्य और समझ

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व्यावहारिक जीवन में नैतिक मूल्य और समझ दुनिया में ऐसे कई पेशे या नोकरी हैं जिन्हें हासिल करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, धैर्य, साहस, दृढ़ता की आवश्यकता होती है।  हजारों पुलिस, डॉक्टर, अग्निशामक, आर्मी, बचावकर्मी, हर मिनट लोगों को बचाते हैं।  जब आप विश्वविद्यालय से स्नातक होते हैं और ऊपर बताए गए व्यवसायों में से किसी एक में महारत हासिल करते हो और उस क्षेत्र के जानकार हो जाते हो , तो आप सफलतापूर्वक अभ्यास करने के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करने की योजना बनाते हैं।  कुछ साल बाद वे एक प्रसिद्ध चिकित्सक, एक समर्पित परिवार के सदस्य बन गए।  लेकिन आपके अभ्यास में एक दुर्घटना आपके जीवन को उल्टा कर सकती हैं और आपको अपनी मूल्य प्रणाली और व्यक्तिगत आचार संहिता पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर सकती हैं !   जब आप आधी रात को अस्पताल जाते हैं, तो आपको आश्चर्य होता हैं कि आप क्या देखेंगे।  कमरे में प्रवेश करने पर, एक रोगी आंखों पर पट्टी बांधकर दिखाई देता है।  जब आप सहकर्मियों से "कोई अपेक्षा नहीं" शब्द सुनते हैं तो आप दोषी महसूस करते हैं।  उस स्थिति में, आपको अपनी पस...

​​​दुनिया का सबसे बड़ा दहेज

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 ​​​दुनिया का सबसे बड़ा दहेज हमारी भारतीय संस्कृति में पहले के जमाने में दहेज का महत्व हुआ करता था ! दहेज के बिना कोई भी व्यक्ति किसी भी लड़की के साथ शादी नहीं करता था,दहेज को सबसे ऊपर रखा जाता था और उसी की बदौलत शादी की जाती थी जिस गरीब परिवार में दहेज देने की क्षमता ना होने की वजह से उन्हें आए दिन बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था ! यह रूढ़िवादी परंपरा अत्यंत भयंकर हो चुकी थी, इसके चलते लाखों महिलाओं ने अपने जीवन के साथ समझौता किया हैं ! उन्होंने अपनी जिंदगी का परित्याग कर कर दूसरों की खुशी के हित में अपनी जिंदगी को हंसते-हंसते समर्पित कर दिया, धन्य हैं वह भारतीय नारी जिसने अपने माता-पिता के लिए अपनी जिंदगी की कुर्बानी यूं ही दे दी शिक्षा के अभाव में आए दिन इन महिलाओं को अत्यंत कठिन समय से गुजरना पड़ता था !  क्योंकि शिक्षा के अभाव में अपनी मानसिक विचारधारा को बदलने के लिए कोई साधन नहीं था ! जिसके चलते इन महिलाओं के प्रति क्रूरता का व्यवहार किया जाता था हर प्रकार से घर में एक नौकर की तरह रखा जाता था मानो यह शादी नहीं हुई है कोई अपनी खरीदी गई संपत्ति के हिसाब से उन...